Tuesday, June 27, 2017

तीन आँखें !



I am not well versed in Hindi which was only my second language. Earlier also I had tried a poem in Hindi. This is my second adventure.


होती उनके चेहरे पे तीन अंकों में सुंदर आँखेंl
रहता, देता  सदा सबको दिल से लेकर, उदार मुस्कानll     
सबक अनमोल है सीखने  उनके काफ़ी संचालन सेl
नुकसान ख़ुद को होने पर भी करता भलाई और जनोंकाll  

कठोर है कवच उसका पर अन्दर है पिखला बिलकुलl
लगाओ छेद, काटकर उसको, करता रहता भिर भी सेवाll  
श्वेत  रंग का साफ़ हृदय, बनता सबका स्वादिषठ्भोजनl 
मीठा जल से मिठाता प्यास बिलकुल बनकर ज़रूर रुचिकरll

पहुँचता ऊपर स्वर्ग तक, शाखा बिना पेड़  पवित्रl
करता रहता बात ईश्वर से दिव्य वृक्ष यह प्यारा नारियलll
धर्ति का नीर गंदा भिरभी, साफ़ कर  बनाता अमृत शुद्धl
स्तगित करके ख़ुद का कlम भी मदद करता और लोगों कीll

9 comments:

  1. Hari OM
    Stirring stuff... शुद्धता और स्पष्टता की अध्यक्षता करना चाहिए!!!
    YAM xx

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  2. I am impressed. I thought you are fluent in Malayalam and English only. Now I will add Hindi also.

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    1. When I am a south Indian person,I can't write much.Thank you for the comment.

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  3. This is very well expressed. Loved your flair in Hindi as well :-)

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  4. Pretty good especially when you say you are well versed. Neat !

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  5. well tried
    nice poem yes coconut tree is very useful

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  6. Thank you,Sujatha.I am not well-versed in Hindi.

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